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थार मरुस्थल के प्रमुख पेड़-पौधे

थार मरुस्थल के प्रमुख पेड़-पौधे
राजस्थान की संस्कृति में पेड़-पौधों का प्राचीन काल से ही महत्व रहा है।
यहां पर पाए जाने वाले पेड़ पौधों का धार्मिक दृष्टि से महत्व होने के कारण इनका संरक्षण भी अच्छी तरह से होता है। यहां पाई जाने वाली कुछ वनस्पतिया औषधिय दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण होती है। यहां के परंपरागत पेड़ जैसे खेजड़ी, बोरड़ी, बबूल, जाल, कुमटिया, रोहिड़ा तथा कैर आदि के बीजों के प्राकृतिक प्रसार से यह खेतों में स्वत ही उग जाती हैं। जिसका खेती करते समय किसान संरक्षण करके इनको बड़ा करते हैं।

इन पेड़ पौधों के मुख्य लाभ-
1. इनकी इमारती काष्ठ से उच्च गुणवत्ता के फर्नीचर बनते हैं।
2. औषधि रूप से महत्वपूर्ण होने के कारण इन से दवाइयां भी बनती है।
3. इनके पतियों के नीचे गिरने से जमीन की उर्वरक क्षमता बढ़ती है।
4. इनके फलों से देशी स्वादिष्ट सब्जियां बनती है।
5. यह पेड़ थार के मरुस्थल को गर्म लू से बचाते हैं।
6. अकाल की स्थिति में इनकी की पत्तियों को पशुओं को चारा के रूप में खिलाते हैं।
7. यह मृदा अपरदन को रोकते हैं।

थार मरुस्थल के मुख्य पेड़-
1.खेजड़ी-
यह राजस्थान का राज्य वृक्ष है इसे तुलसी भी कहते हैं। इसका धार्मिक दृष्टि से पूजन भी होता है।
इस पर लगने वाले फलों को सांगरी कहते हैं। जिससे अच्छी स्वादिष्ट सब्जी बनती है।
इनकी पतियों को आम भाषा में लुंक कहा जाता है। इनकी पत्तियों को पशुओं के चारे के रूप में खिलाते हैं। यह वृक्ष कम उपजाऊ मिट्टी व अकाल की स्थिति में हरा भरा रहता है।
वानस्पतिक नाम- प्रोसोपिस सिनेररिया

2. रोहिड़ा-
यह राजस्थान का राज्य फूल है। इसकी फूल पीले रंग के बहुत ही आकर्षक होते हैं।
इसकी लकड़ी थार के सभी वृक्षों से गुणवत्तापूर्ण होती है।
इसकी इमारती लकड़ी से घरों के दरवाजे चारपाई तथा फर्नीचर बनाए जाते हैं। इसके फल मनुष्य के खाने लायक नहीं होकर सिर्फ पशुओं को खिलाया जाता है।
वानस्पतिक नाम- tecomella undulata

3.कुमट
यह एक कांटेदार वृक्ष है। और इसके फलों के बीजों से बहुत अच्छी स्वादिष्ट सब्जी बनती है।
इसकी पत्तियां बहुत छोटी होती है इसकी लकड़ी घरेलू सामान तथा किसानों के औजारों के हत्थे बनाने में उपयोगी होती है। इसके वृक्ष से गोंद का उत्पादन होता है।
वनस्पति के नाम- Aceasia Senegal


3.जाल-
जाल के वृक्ष की गहरी घनी छाया होती है। इसके फल को पीलू कहा जाता है। यहां के लोग इसे राजस्थान का अंगूर कहते हैं। पिलू रंग बिरंगे तथा खाने में बहुत ही स्वादिष्ट होते हैं।जाल के वृक्ष के नीचे थार की तपती रेत में जंगली जानवर तथा पालतू जानवर अपना आश्रय बनाते हैं। इस की लकड़ी से खेत की बाड़ तथा छप्पर बनाए जाते है।

4.बैर-  यह एक कांटेदार झाड़ी वृक्ष है।
इसके फलों को बेर कहा जाता है। बेर खाने में मीठे खट्टे स्वादिष्ट होते हैं।इसकी पत्तियां पशुओं को खिलाने में तथा इसके कांटों को बाड़ बनाने में उपयोग किया जाता है।
वानस्पतिक नाम- Ziziphus iuiuba


5.कैर-
यह भी एक कांटेदार झाड़ी वृक्ष है। केयर के फलों से स्वादिष्ट सब्जी तथा अचार बनाया जाता है।
इसकी लकड़ी खाना बनाने में जलाने के लिए तथा गांव में  खेत की बाड़ बनाने मैं उपयोगी होती है।
यह ज्यादातर  ओरण भूमि में पाए जाते हैं।
वानस्पतिक नाम- Acacia catechu

6.नीम-

नीम एक औषधीय वृक्ष है। इसके फलों को निंबोली कहा जाता है,जो खाने में मीठी होती हैं।
यह वृक्ष थार वासियों के लगभग प्रत्येक घर में पाया जाता है। इसकी लकड़ी इमारती होती है जिससे फर्नीचर बनाए जाते हैं।
वानस्पतिक नाम- Azadirachta indica

उपरोक्त दिया गया परिचय थार की प्रमुख वनस्पति का एक सामान्य विवरण है।


Report by Kêshãv Bose



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